देवघर। रक्षाबंधन भारत के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है। यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसकी लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि भाई जीवनभर उसकी रक्षा का वचन देता है।


पहली बार किसने मनाया था रक्षाबंधन?


रक्षाबंधन की शुरुआत को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। सबसे अधिक मान्यता देवी लक्ष्मी और राजा बली की कथा को दी जाती है। कथा के अनुसार, भगवान विष्णु राजा बली के वचन के कारण पाताल लोक में रहने लगे थे। तब देवी लक्ष्मी ने राजा बली की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें अपना भाई बनाया। बदले में राजा बली ने भगवान विष्णु को वैकुंठ लौटने का वरदान दिया। इसी घटना को रक्षाबंधन की परंपरा की शुरुआत माना जाता है।


महाभारत से भी जुड़ी है राखी की कथा


महाभारत में एक प्रसिद्ध प्रसंग मिलता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण की उंगली से रक्त बहा, तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया। श्रीकृष्ण ने उस स्नेह के बदले जीवनभर द्रौपदी की रक्षा का वचन निभाया। यह कथा भी रक्षाबंधन के महत्व को मजबूत करती है।


रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव का संदेश देने वाला राष्ट्रीय सांस्कृतिक पर्व बन चुका है।